शाम ख़ामोश है.... पेड़ों पे उजाला कम है,


शाम ख़ामोश है.... पेड़ों पे उजाला कम है,
लौट आए हैं सभी....पर एक परिंदा कम है...।
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इन पंक्तियो में कवि उस हरामी का इंतज़ार कर रहा हैं......जिस को बोतल लेने के लिए था।
😂🤣😂🤣


shaam khaamosh hai.... pedon pe ujaala kam hai,

laut aae hain sabhee....par ek parinda kam hai....

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in panktiyo mein kavi us haraamee ka intazaar kar raha hain......
jis ko botal lene ke lie tha.

😂🤣😂🤣

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