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*घबराने से मसले, हल नहीं होते.**जो आज है, वो कल नहीं होते.*...

Hindi shayari


*घबराने से मसले, हल नहीं होते.*
*जो आज है, वो कल नहीं होते.*

*ध्यान रखो, इस बात का ज़रूर,*
*कीचड़ में सब, कमल नहीं होते.*

*नफ़ा पहुँचाते हैं, जो जिस्म को,*
*मीठे अक्सर, वो फल नहीं होते.*

*जुगाड़, करना पड़ता है हमेशा,*
*रस्ते तो कभी, सरल नहीं होते.*

*दर्द की सर्द हवा से, बनते हैं जो,*
*वो ठोस कभी, तरल नहीं होते.*

*नफ़रत की खाद से, जो पेड़ पनपते हैं,*
*मीठे उनके कभी, फल नहीं होते.*

*जो आपको, आपसे ज्यादा समझे,*
*ऐसे लोग, दरअसल नहीं होते.*
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